लिखे जा रहे हम ग़ज़ल गीत मुक्तक।
मगर चाहतों पर, हमारी, तुम्हें शक।
तुम्हें रात-दिन चाहना, याद करना,
पहुँचती नहीं क्यों तड़प मेरी तुम तक।
-विकास सोनी ऋतुराज
उड़ाकर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे, मेरे ख्वाबों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे...
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लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...
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लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...
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रोज सवेरे आए चिड़िया देखो मेरे आँगन में। गीत मधुर फिर गाए चिड़िया देखो मेरे आँगन में। दूर खड़े होकर यह जाना चिन्ता उसको बच्चो...
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