सर चढ़ कर बोले नशा, होली का इस बार,
नफरत को हम भूल कर, बाटें सब में प्यार।
जोगीरा सारा रा रा
राधा पिचकारी भरे, सखियों को ले संग।
मोहन दिख जाए कहीं, मल दूँ उसके रंग।
जोगीरा सारा रा रा
बैठे तुम उस पार हो, मैं बैठा इस पार,
आखिर कैसे फिर मने, होली का त्यौहार।
जोगीरा सारा रा रा
-विकास सोनी ऋतुराज
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