सोमवार, 6 मार्च 2017

एक मुक्तक- देखो मेरे आँगन में



 रोज सवेरे आए चिड़िया
देखो मेरे आँगन में।
गीत मधुर फिर गाए चिड़िया
देखो मेरे आँगन में।
दूर खड़े होकर यह जाना
चिन्ता उसको बच्चों की,
दे दाना उड़ जाए चिड़िया
देखो मेरे आँगन में।
                   -विकास सोनी ऋतुराज 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...