एक शेर-
इस ब्लॉग के लिए-----
उड़ा कर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे,
मेरी पलकों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे ।
इस ब्लॉग के लिए-----
उड़ा कर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे,
मेरी पलकों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे ।
उड़ाकर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे, मेरे ख्वाबों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे...
लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...
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