उड़ाकर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे, मेरे ख्वाबों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे...
मंगलवार, 28 मार्च 2017
गुरुवार, 16 मार्च 2017
तीन दोहे
सर चढ़ कर बोले नशा, होली का इस बार,
नफरत को हम भूल कर, बाटें सब में प्यार।
जोगीरा सारा रा रा
राधा पिचकारी भरे, सखियों को ले संग।
मोहन दिख जाए कहीं, मल दूँ उसके रंग।
जोगीरा सारा रा रा
बैठे तुम उस पार हो, मैं बैठा इस पार,
आखिर कैसे फिर मने, होली का त्यौहार।
जोगीरा सारा रा रा
-विकास सोनी ऋतुराज
बुधवार, 8 मार्च 2017
एक मुक्तक-तड़प
लिखे जा रहे हम ग़ज़ल गीत मुक्तक।
मगर चाहतों पर, हमारी, तुम्हें शक।
तुम्हें रात-दिन चाहना, याद करना,
पहुँचती नहीं क्यों तड़प मेरी तुम तक।
-विकास सोनी ऋतुराज
सोमवार, 6 मार्च 2017
गुरुवार, 2 मार्च 2017
दोहे और मुक्तक
दो दोहे-
हिंदी जैसी है नहीं, दूजी भाषा और।
सब भाषाओं की यही, हिंदी है सिरमौर।
सबके होठों पर सजी, भारत माँ की शान।
हिंदी भाषा बोलकर, मिलता है सम्मान।
दो मुक्तक-
झुके कन्धों के हाले-दर्द को बेटी समझती है।
छिपे दिल में जो हैं जज्बात वो बेटी समझती है।
सदा भईया के हर ताने पे बेहद खिलखिलाते हैं,
हँसें झूठी हँसी माँ-बाप तो बेटी समझती है।
लड़ी हर जंग जीवन की कभी हिम्मत नहीं हारी।
तुम्हें खुश देखने को ही गला दी उम्र भी सारी।
शिथिल जब हो गई है आज, तुम पर बोझ लगती है,
तुम्हें पैदा किया जिसने वही माँ आज बेचारी।
-विकास सोनी'ऋतुराज'
https://www.youtube.com/watch?v=1oF8IjwQd88
हिंदी जैसी है नहीं, दूजी भाषा और।
सब भाषाओं की यही, हिंदी है सिरमौर।
सबके होठों पर सजी, भारत माँ की शान।
हिंदी भाषा बोलकर, मिलता है सम्मान।
दो मुक्तक-
झुके कन्धों के हाले-दर्द को बेटी समझती है।
छिपे दिल में जो हैं जज्बात वो बेटी समझती है।
सदा भईया के हर ताने पे बेहद खिलखिलाते हैं,
हँसें झूठी हँसी माँ-बाप तो बेटी समझती है।
लड़ी हर जंग जीवन की कभी हिम्मत नहीं हारी।
तुम्हें खुश देखने को ही गला दी उम्र भी सारी।
शिथिल जब हो गई है आज, तुम पर बोझ लगती है,
तुम्हें पैदा किया जिसने वही माँ आज बेचारी।
-विकास सोनी'ऋतुराज'
https://www.youtube.com/watch?v=1oF8IjwQd88
सिर्फ तुम्हारे लिए
एक शेर-
इस ब्लॉग के लिए-----
उड़ा कर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे,
मेरी पलकों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे ।
इस ब्लॉग के लिए-----
उड़ा कर ले गए जुगनू मेरी आँखों से तब नींदे,
मेरी पलकों की चौखट पर खड़े आने को जब तुम थे ।
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लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...
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लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...
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रोज सवेरे आए चिड़िया देखो मेरे आँगन में। गीत मधुर फिर गाए चिड़िया देखो मेरे आँगन में। दूर खड़े होकर यह जाना चिन्ता उसको बच्चो...

