लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक।
हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक।
बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे,
उसे शायद हमारी चाहतों पर हो रहा है शक़।
-विकास सोनी 'ऋतुराज'
हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक।
बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे,
उसे शायद हमारी चाहतों पर हो रहा है शक़।
-विकास सोनी 'ऋतुराज'

