गुरुवार, 20 अप्रैल 2017

लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक।
हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक।
बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे,
उसे शायद हमारी चाहतों पर हो रहा है शक़।
                        -विकास सोनी 'ऋतुराज'

शनिवार, 15 अप्रैल 2017

प्यास दिल की बुझे

रात से कोई मैसेज न मुझको मिला,
ऑनलाइन न कल से दिखे हो मुझे।
हो सके दो मिनट कॉल कर लो ज़रा,
बात कर लूं ज़रा, प्यास दिल की बुझे।
                 -विकास सोनी 'ऋतुराज'

लिखे जिसकी मुहब्बत में ग़ज़ल कुछ गीत कुछ मुक्तक। हमारी चाह थी इतनी कि पहुँचे आह बस उस तक। बिना जाने हक़ीक़त रूठकर वो चल दिया ऐसे, उसे शायद ह...